सूरज – बिहाणा रा गीत

सूरज – बिहाणा रा गीत

थे म्हांर आज्यो कासब जी रा सूरज पांवणा , कोई उगंतड़ परभात।
ऊंचीसी मेड़ी ओ सूरज जी उगिया , जग म हुयो रे उजास।
गिद्दी तो ढालू ओ सूरज जी रेशमी , फूलड़ां जड़यो रे बाजोट।
चावल रान्धू ओ सूरज जी उजला , हरीय रे मूंगा री धोवा दाल।
घी भर घालु ओ सूरज जी तोलणो , असल जरापुर री खांड।
पोली तो पोऊं ओ सूरज जी लचपची , तेवन तीस बतीश।
केर – करेला ओ सूरज जी स तलु , पापड़ तलु रे पचास।
थाल परोस ओ सूरज जी थांर पदमणी , नेवर र झिणकार।
जीम्यां तो जुठ्या ओ सूरज जी रंज रया , अमरत चलु रे कराय।
ऊँचा तो घालु ओ सूरज जी थांरा बेसणा , लुल – लुल लागूं थांर पाँव।
थे म्हांर आज्यो सूरज जी ओ बाबा पांवणा , कर न केशरिया बीणाव।

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Team DilseMarwari

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