देवलदे – बिहाणा रा गीत

देवलदे – बिहाणा रा गीत

नदी र किनारे राणी देवल दे ओ उभा , देवल दे ओ उभा।
उभा तो उभा आमल दुबला।
काई ऐ बहन थांरो पिवरीयो परदेश , कोई पिवरीयो परदेश।
काई थांरो परणीयोडो राजन घर बस।
कांई ऐ बहन थांरो बाबुल कीन्हो दमडा रो लोभ , कोई दमडा रो लोभ।
कांई ऐ परणाई बूढ़ डोकर।
नहीं ऐ बहन म्हांरो पिवरीयो परदेश , कोई पिवरीयो परदेश।
नहीं म्हांरो परणीयोडो राजन घर बस।
नहीं ऐ बहन म्हांरो बाबुल कीन्हो दमडा रो लोभ , कोई दमडा रो लोभ।
नहीं ऐ परणाई बूढ़ डोकर।
सात पुतर जनमियां बाई सिलारे पछाट , कोई सिलारे पछाट।
आठ वे री बेल्यां बाई होय रही।
ज ऐ बहन थारे जनमेला पूत , कोई जनमेला पूत।
हम घर बालक बाई घर मोकला।
जनम्याँ कान्हजी ढलतोड़ी रात , कोई ढलतोड़ी रात।
मायत्ता री बेडियां आप ही झड़ पड़ी।
घाल्यो वासुदेवजी ओडलीये रे मायं , कोई ओडलीये रे मायं।
आगे तो जमुना गहरी गाजती।
काढयो कानुड़ो डावड़ो पाँव , कोई डावड़ो पाँव।
जमुना माता रो बारो दे दियो।

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Team DilseMarwari

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