मालण – गणगौर गीत

(मालण)
ओ कुन तोड़ ऐ गोरो मरवारा फूल, ओ कुन बाड़ी रुंद जी।
ईशरदास तोड़ ऐ गोरो मरवारा फूल, कानीराम बाड़ी रुंद जी।
गेली मालण ऐ मालण करे रे पुकार, जाय न बिरमादास जी री ओबारीया
बिरमादास जी ओ थार कंवरा न राख, म्हारी जी बाड़ी रुंद जी
गेली मालण ऐ, मालण असल गिवार,म्हारा जी कंवर घोड़ी चढ़
दिन दस छ ऐ बाई गंवरा रो साथ, घुड़ला ढुकावना निसरया
(इसी तरह अपने घर वालो का नाम लेना )

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Team DilseMarwari

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