धूपइयो – गणगौर गीत

(धूपइयो) धुप देई धूपइयो ऐ, दियो बाई रोंवा र हाथ अरघ देई बर पायो ऐ,पाया ईशरदास जी भरतार कुनासा री बाई कुल बहु ऐ, कुनासा री धीव ब्रह्मादास जी री कुल बहु ऐ, हेमाजल जी री धीव भांया री बेन सवासणी ऐ पायो ईशरजी रो साथ ज तेरी धुपियो सापज ऐ, सुहागन सांज सवेर। हांथा […]

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सीठना – गणगौर गीत

(सीठना) ईशरदास जी तो पेचो बांधे गवरा बाई पेच संवारो ओ राज , म्हे ईशर थांरी साली छा। साली छा मतवाली ओ राज, भंवर पंट्टा पट वारी ओ राज, केशर की सी क्यारी ओ राज, लूंगा किसी बाड़ी ओ राज, म्हे ईशर थारी साली छा। ईशरजी तो डोरो पेर गोरा बाई गर्दन संवार ओ राज, […]

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कांगसियो – गणगौर गीत

(कांगसियो) ईशरदास बीरे को कांगसियो म्हे मोल लेस्या राज, रोवाँ बाई रा लम्बा तीखा केश, कांगसियो बाई र सिरे चढ्यो जी राज। कानीराम बीरे रो कांगसियो म्हे मोल लेस्या राज , सोंवा बाई रा लम्बा तीखा केश, कांगसियो बाई रे सिरे चढ्यो जी राज। (इस तरह अपने भाई बहन का नाम लेना)

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मेहँदी – गणगौर गीत

(मेहँदी) पीलो ओढ, पोमचो ओढ्यो-२ सज सिंगार लगाई जी आ मेहँदी-२ टग टग चाली जाय रसोई मे-२ सासुजी ने जाय दिखाई जी आ मेहँदी-२ गवरल ऐ हाथ थारा गेरा गेरा राच्या-२ कुण संग बैठ मंडाई जी आ मेहँदी-२ प्यारी सखी म्हारे मांडी जी आ मेहँदी-२ म्हारे कानीराम बैठ सराई जी आ मेहँदी हो म्हारे देवरियोजी […]

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चुनड़ी – गणगौर गीत

(चुनड़ी ) १ आ तो चुनड़ली रो बहु गोरा दे न कोड, लेदीयो नी ब्रह्मादास जी रा छावा चुनड़ी। ओ जी म्हे तो फिर आया राजा रानी देश परदेश, कठ इन लाधी सवागन चुनड़ी। आ तो लाधी लाधी हेमाजल जी री पोल, ओढो नी ओ भायां री ऐ बेनड चुनड़ी। आ तो चुनड़ली रो बहु […]

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टीकी – गणगौर गीत

(टीकी) १ हल्दी है घाट घटीली ओ राज ईशरदास जी री नार हठीली ओ राज मांगे है सोने री टीकी ओ राज ईशरदास जी बैठ घडावे ओ राज बहु गवरा चेप दिखावे ओ राज। (इसी तरह भाई और भाभी का नाम लेना ) २ थे ईशरदास जी जायजो समंदा पार, क टीकी लाईजो जड़ाव की […]

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हिण्डो – गणगौर गीत

(हिण्डो) १ अमले री डाली हिण्डो मांड्यों,हिंडन आई गोरा बाई जठ ईशरदास बीरो हिण्डो मांड्यों ,हिंडन आई रोंवा बाई जठ कानीराम बीरो हिण्डो मांड्यों, हिंडन आई सोंवा बाई धीरे से झोटा देई म्हारा बीरा रे डरपेली थारी बाई डरे डराइ रो हंस घडास्यां चुड़ले री चतुराई (इसी तरह भाई बहन का नाम लेना) २ चम्पे […]

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मालण – गणगौर गीत

(मालण) ओ कुन तोड़ ऐ गोरो मरवारा फूल, ओ कुन बाड़ी रुंद जी। ईशरदास तोड़ ऐ गोरो मरवारा फूल, कानीराम बाड़ी रुंद जी। गेली मालण ऐ मालण करे रे पुकार, जाय न बिरमादास जी री ओबारीया बिरमादास जी ओ थार कंवरा न राख, म्हारी जी बाड़ी रुंद जी गेली मालण ऐ, मालण असल गिवार,म्हारा जी […]

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